प्रुरिटिस (सूखी खुजली) क्या है?

सूखी खुजली (Pruritis) एक ऐसी स्थिति है जिसमें त्वचा में अत्यधिक खुजली होती है। यह समस्या कई कारणों से हो सकती है, जैसे—त्वचा रोग, एलर्जी, लिवर की बीमारी, डायबिटीज या तनाव। आयुर्वेद में इसे “कण्डू” (Kandu) कहा जाता है, जो वात, पित्त और कफ दोष के असंतुलन के कारण होता है।

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प्रुरिटिस के प्रमुख कारण (आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से)

आयुर्वेद के अनुसार, खुजली मुख्य रूप से पित्त दोष के बढ़ने से होती है, जिसके कारण रक्त (रक्त दूषित होना) और त्वचा में जलन पैदा होती है। कुछ प्रमुख कारण निम्न हैं:

  1. पित्त प्रकोप – अधिक मसालेदार, तला हुआ भोजन, गर्म पेय पदार्थों का सेवन।
  2. वात विकार – त्वचा का रूखापन (ड्राई स्किन)।
  3. कफ दोष – चिपचिपी त्वचा और फोड़े-फुंसियों का बनना।
  4. अमा (टॉक्सिन्स) का जमाव – पाचन तंत्र की खराबी के कारण।
  5. मानसिक तनाव – तनाव और अनिद्रा से भी खुजली बढ़ सकती है।

प्रुरिटिस के लक्षण

  • त्वचा पर लाल चकत्ते और सूजन
  • रात को खुजली का बढ़ना
  • खुजलाने के बाद त्वचा का फटना या खरोंच आना
  • त्वचा का रूखा और पपड़ीदार होना

आयुर्वेदिक उपचार और घरेलू नुस्खे

1. आहार संशोधन (Diet for Pruritis)

  • पित्त शामक आहार – मीठे फल (खीरा, तरबूज), हरी सब्जियां, नारियल पानी।
  • वात शांत करने वाले खाद्य पदार्थ – घी, दूध, मूंग दाल।
  • कफ कम करने वाले आहार – अदरक, शहद, गर्म पानी।
  • परहेज – मिर्च, तेल, अचार, जंक फूड, अल्कोहल।

2. जड़ी-बूटियाँ और आयुर्वेदिक दवाएं

  • नीम – एंटी-बैक्टीरियल गुणों के कारण खुजली को कम करता है।
  • अलसी के बीज – ओमेगा-3 से त्वचा की सूजन कम होती है।
  • हल्दी और चंदन – दूध के साथ लेने से खुजली में आराम मिलता है।
  • महानारायण तेल – खुजली वाली जगह पर लगाने से लाभ होता है।
  • आयुर्वेदिक औषधियाँ – कैशोर गुग्गुल, सारिवादी क्वाथ, पंचतिक्त घन वटी

3. योग और प्राणायाम

  • सूर्य नमस्कार – रक्त संचार बढ़ाता है।
  • कपालभाति प्राणायाम – शरीर से विषाक्त पदार्थ निकालता है।
  • शीतली प्राणायाम – पित्त दोष को शांत करता है।

निष्कर्ष

प्रुरिटिस (खुजली) एक कष्टदायक समस्या है, लेकिन आयुर्वेदिक उपचार और जीवनशैली में बदलाव करके इसे नियंत्रित किया जा सकता है। संतुलित आहार, नियमित योग और प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का उपयोग करके इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी उपचार को शुरू करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।